वित्तीय विवरण - विश्लेषण एवं निर्वचन [FINANCIAL STATEMENTS-ANALYSIS AND INTERPRETATION]

वित्तीय विवरण - विश्लेषण एवं निर्वचन
[FINANCIAL STATEMENTS-ANALYSIS AND INTERPRETATION]

व्यवसाय में होने वाले लेन-देनों का अभिलेखन करना आवश्यक होता है। इन्हीं लेखों से वित्तीय विवरण तैयार किये जाते हैं। वित्तीय विवरणों से व्यवसाय की स्थिति स्पष्ट होती है। वित्तीय विवरण प्रबन्धन, कर्मचारियों, सरकार तथा अन्य पक्षों के लिये भी महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्रदान करते हैं। वित्तीय विवरण लक्ष्य नहीं साधन मात्र होते हैं। इनका महत्व उनके विश्लेषण एवं निर्वचन में सम्मिलित होता है।

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का आशय (Meaning of Analysis of Financia Statements)

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से आशय ऐसी प्रक्रिया से है जिससे व्यावसायिक संस्था की आर्थिक स्थिति, अर्जन क्षमता आदि का पता लगाया जा सके ताकि उनके आधार पर उचित निष्कर्ष एवं निर्णय लिये जा सकें।

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की परिभाषाएं (Definition of Analysis of Financia Statements)

जॉन.एन. मेयर के अनुसार, “वित्तीय विवरण विश्लेषण व्यापक रूप में एक समूह द्वारा प्रकट किये गये विभिन्न वित्तीय कारकों के मध्य सम्बन्धों का अध्ययन हैं। साथ ही विवरणों की श्रृंखला इन कारकों की प्रवृत्ति का अध्ययन भी हैं।

मेटकाफ एवं टिटार्ड के अनुसार, “वित्तीय विवरणों का विश्लेषण किसी संस्था की स्थिति तथा निष्पादन का उत्तम ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से वित्तीय विवरण के विभिन्न घटकों के मध्य मूल्यांकन की प्रक्रिया है।"

वित्तीय विवरणों के निर्वचन का आशय (Meaning of Interpretation of Financial Statements) - निर्वचन, विश्लेषण के बाद की क्रिया में निर्वचन में समंकों का वर्गीकरण, व्यवस्था, सम्बन्ध तथा निष्कर्ष निकालने के क्रियाओं को शामिल किया जाता है।

स्पाइसर तथा पेगलर के अनुसार, “निर्वचन कला तथा विज्ञान है जिसके द्वारा खातों में दिये गये अंकों को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है जिससे व्यवसाय की आर्थिक शक्तियाँ तथा कमजोरियाँ कारण सहित प्रकट हो सकें।"

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के उद्देश्य (Objectives of Financial Statements Analysis)

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

1. अर्जन क्षमता का निर्धारण (Determination of Earning Capacity) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण द्वारा व्यवसाय की अर्जन क्षमता तथा लाभदायकता का निर्धारण किया जा सकता है तथा इनसे भविष्य की सम्भावनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है।

2. तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study) - वित्तीय विवरणों के आधार पर विभिन्न व्यवसायों का तुलनात्मक अध्ययन कर उचित निष्कर्ष निकाले जाते हैं। जो भी कमजोरियाँ या त्रुटियाँ संज्ञान में आती हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाता है।

3. निर्णयन में सहायक (Helpful in Decision Making) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के आधार पर निकाले गये निष्कर्ष निर्णयन में सहायक होते हैं।

4. वित्तीय कमजोरियों का ज्ञान (Knowledge of Financial Weaknesses) — वित्तीय कमजोरियों का ज्ञान, वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के आधार पर आसानी से प्राप्त किया जा सकता है तथा इसके सम्बन्ध में उचित सुधारात्मक कदम उठाये जाते हैं।

5. तरलता का निर्धारण (Determination of Liquidity) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से व्यवसाय की तरलता का निर्धारण भी किया जा सकता है तथा इस सम्बन्ध में उचित निर्णय लिये जा सकते हैं।

6. प्रबन्ध कुशलता का निर्धारण (Determination of Efficiency of Management) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से व्यवसाय की कार्यकुशलता का मापन किया जा सकता है जिससे प्रबन्ध की कुशलता की जानकारी प्राप्त होती है।

7. पूर्वानुमान (Estimation) - वित्तीय विवरणों की भूतकाल की सूचनाओं की जानकारी के आधार पर व्यवसाय भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं का अनुमान लगा सकता है तथा आवश्यकता होने पर उसमें संशोधन कर सकता है।

विभिन्न पक्षों के लिए वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की आवश्यकता और महत्व (Need and Importance of Financial Statements Analysis for Various Parties)

विभिन्न पक्षों के लिए वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की आवश्यकता और महत्व निम्नलिखित है -

1. कर्मचारियों के लिए (For Employees) — कर्मचारियों के लिए वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसी से कर्मचारियों को यह पता चलता है कि व्यवसाय की लाभ-हानि की स्थिति क्या है? यदि व्यवसाय की लाभदायकता अच्छी है तो कर्मचारियों के वेतन में कितनी वृद्धि सम्भव है।

2. प्रबन्धकों के लिए (For Managers) – वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से प्रबन्धकों को यह जानकारी मिलती है कि उनके द्वारा लिए गए निर्णयों का व्यवसाय की तरलता, लाभदायकता आदि पर क्या प्रभाव पड़ा है? यदि कुछ कमियाँ प्रकट होती हैं तो उन्हें दूर करने के उपाय किये जाते हैं।

3. निवेशकों के लिए (For Investors) — निवेशक व्यवसाय द्वारा दिये गये लाभांश की तुलना व्यवसाय के अंश के बाजार मूल्य से करके व्यवसाय के लाभों का अनुमान लगा सकते हैं। यह कार्य वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से ही सम्भव है।

4. ऋणदाताओं के लिए (For Lenders) – वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करके ऋणदाता यह पता लगा सकते हैं कि व्यवसाय के पास उनके ऋण को चुकाने के लिए पर्याप्त चालू सम्पत्तियाँ तथा नकद धनराशि है अथवा नहीं।

5. वित्तीय संस्थाओं के लिए (For Financial Institutions) — वित्तीय संस्थाएँ जो व्यवसाय को वित प्रदान करती हैं ऐसी सभी संस्थाएँ वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करके व्यवसाय की लाभ अर्जन क्षमता तथा वित्तीय स्थिति का पता लगा सकती हैं।

6. सरकार के लिए (For Government) - वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करके सरकार यह ज्ञात कर सकती है कि व्यवसाय में लागत की तुलना में लाभ कम है तो सरकार जीएसटी कम कर सकती है अथवा यदि लागत की तुलना में लाभ अधिक है तो जीएसटी में वृद्धि कर सकती है जिससे कि कीमतों पर नियन्त्रण रखा जा सके।

7. अन्य पक्षों के लिए (For Other Parties) — व्यवसाय के वित्तीय विवरणों के विश्लेषण में कुछ अन्य पक्ष भी रुचि रखते हैं जैसे-स्कन्ध विपणि, अर्थशास्त्री, वित्तीय विश्लेषक, कर अधिकारी आदि ।

वित्तीय विवरण विश्लेषण के उपयोग (Uses of Financial Statements Analysis)

वित्तीय विवरण विश्लेषण के उपयोग निम्नलिखित है -

1. साख या उधार निर्णय के लिए (For Credit Decisions) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से किसी ग्राहक को उधार देने या न देने के सम्बन्ध में निर्णय किया जा सकता है। 

2. लाभांश निर्णय के लिए (For Dividend Decisions) - लाभांश के रूप में लाभों का कितना भाग बाँटा जाये एवं कितना भाग व्यवसाय में रखा जाये इसका निर्णय करने में वित्तीय विवरण विश्लेषण उपयोगी होता है। 

3. विनियोग निर्णय लेने के लिए (For Investment Decisions) - कोई भी ऐसा व्यक्ति जो व्यवसाय में विनियोग करता है उसे अपने विनियोग के सम्बन्ध में निर्णय लेने के लिए वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से सहायता मिलती है।

4. प्रबन्ध निर्णय के लिए (For Management Decisions) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से प्रबन्ध को व्यवसाय की तरलता, शोधन क्षमता आदि के सम्बन्ध में निर्णय लेने के साथ ही कमजोरियों का उपाय करने में सहायता मिलती है। 

5. व्यवसाय की प्रवृत्ति का अनुमान लगाने के लिए (For Estimating Trend of Business) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से प्रवृत्ति का अनुमान लगाने में सहायता मिलती है तथा यह भविष्य की व्यवसाय की प्रगति का अनुमान लगाने में भी सहायक होता है।

वित्तीय विवरण विश्लेषण की सीमाएँ (Limitations of Financial Statement Analysis) 

वित्तीय विवरण विश्लेषण की सीमाएँ निम्नलिखित हैं -

1. भावी अनुमानों में कठिनाई (Difficulty in Future Estimates) - वित्तीय विवरण भूतकालीन घटनाओं पर आधारित होते हैं। इसलिए इनसे प्राप्त होने वाले निष्कर्षों को भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाने में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

2. मूल्यों में परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Change in Prices) - मूल्यों में परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए, पिछले वर्ष के आँकड़ों की तुलना चालू वर्ष के आँकड़ों से करने पर भ्रमात्मक परिणाम निकल सकते हैं।

3. लेखांकन रीतियों में परिवर्तन (Change in Accounting Methods) - यदि व्यवसायों में अलग-अलग लेखांकन विधियों का प्रयोग हो रहा है, तब व्यवसायों के बीच तुलना करने पर वह अविश्वसनीय होगी तथा इनसे प्राप्त होने त्राले परिणाम भी भ्रमात्मक होंगे।

4. विशेष ज्ञान की आवश्यकता (Need of Special Knowledge) - वित्तीय विवरणों से उचित निष्कर्ष निकालने के लिए विशेष ज्ञान की आवश्यकता होती है।

5. गुणात्मक विश्लेषण का अभाव (Lack of Qualitative Analysis) - वित्तीय विवरणों में मुद्रा में व्यक्त होने वाली सूचनाएँ ही दी जाती हैं किन्तु कुछ ऐसे तत्व भी होते हैं। जो गुण सम्बन्धी होते हैं उन्हें मुद्रा में व्यक्त नहीं किया जा सकता। इन गुणात्मक तत्वों पर वित्तीय विवरणों में कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।

6. वित्तीय विवरणों की सीमाएँ (Limitations of Financial Statements) - वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की अनेक विधियाँ होती हैं। कौन-सी परिस्थिति में किस विधि का प्रयोग किया जाये यह विश्लेषण करने वाले की योग्यता एवं अनुभव पर निर्भर करता है ?

7. दिखावटी लेन-देनों का प्रभाव (Effect of Bond Washing Transaction) — वित्तीय विवरणों में कुछ लेन-देन ऐसे होते हैं जो केवल दिखावटी होते हैं। ऐसी दशा में वित्तीय विवरण विश्लेषण से प्राप्त होने वाले परिणाम भ्रमात्मक होंगे।

8. विभिन्न निर्वचन (Various Interpretations) - वित्तीय विवरणों से प्राप्त निष्कर्षों का प्रयोगकर्ता विभिन्न प्रकार से निर्वचन कर सकता है।

9. समंकों की विश्वसनीयता (Reliability of Data) - वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता समंकों की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि समंकों में हेरा फेरी हुई है तो वित्तीय विवरणों से प्राप्त निष्कर्ष भी भ्रमात्मक होंगे।

10. विभिन्न फर्मों से तुलना की सीमाएँ (Limitations in Inter-firm Comparison) - विभिन्न फर्मों की तुलना करने से उसी समय उचित निष्कर्ष निकल सकते हैं जब सभी फर्मों की कार्य प्रकृति, लेखांकन पद्धति समान हो।

वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के उपकरण या तकनीक (Techniques or Tools of Financial Statements Analysis) 

 वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के उपकरण या तकनीकें निम्न प्रकार हैं - 

(1) तुलनात्मक वित्तीय विवरण (Comparative Financial Statement) - ऐसे विवरण जिनमें दो या दो से अधिक अवधियों के वित्तीय समंक तुलनात्मक रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं उन्हें तुलनात्मक स्थिति विवरण या तुलनात्मक वित्तीय विवरण कहते हैं। इनमें प्रतिशत वृद्धि या कमी को दिखाया जाता है। ये विवरण क्षैतिज विश्लेषण के आधार होते हैं।

(2) समान माप विवरण (Common Size Statement) - समान माप के विवरण ऐसे विवरण हैं जिनमें एक समान आधार पर विभिन्न मदों को प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है। इस प्रकार के विश्लेषण को शीर्ष या लम्बवत् (Vertical Analysis) कहते हैं। 


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